Friday, 16 May 2014

नीतिश कुमार का आस्तित्व अब हाशिए पर

राकेश कुमार

लोकसभा चुनाव 2014 के परिणाम सबको चौकाने वाले रहे। भाजपा ने जहां अकेले ही 282 सीटें जीत ली, वही वह सहयोगी दलों के साथ मिलकर 335 का आकंडा भी पार कर गई। भारतीय चुनाव की इतिहास में यह शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि लगातार 10 सालों तक केंद्र में राज करने वाली कांग्रेस केवल 44 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। कई राज्‍यों में तो भाजपा ने कांग्रेस का सुफड़ा ही साफ कर दिया है और विरोधियों को उनके घर में घुस कर उन्‍हें मात दी है।

बात करें उत्‍तरप्रदेश, बिहार और झारखंड की तो, भाजपा ने अपने इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए इन तीनों ही राज्‍यों के विरोधियों को शून्‍य पर लाकर खड़ा कर दिया है। उत्तरप्रदेश में जहां भाजपा ने 80 में से 73 सीटें जीती वहीं सपा केवल 5 सीटें जीत पाई, वह भी केवल अपने परिवार के बदौलत। यहां बसपा का खाता भी नही खुला हालांकि कांग्रेस ने दो सीटों पर बाजी मारी जिसमें अमेठी और रायबरेली सीट शामिल है।

वहीं बिहार में तो एक तरह से भाजपा ने जदयू को अर्श से फर्श पर ला दिया है। कुशासन की बात करने वाली  और लोकसभा चुनाव 2009 में 20 सीटें जीतने वाली जदयू अपने ही राज्‍य में अपना आस्तित्‍व तक नहीं बचा पाई और 40 सीटों में से केवल 2 सीटें जीत पाई जिसके बारे में नीतिश कुमार  ने कभी सपने में भी नहीं सोंचा था। वहीं भाजपा ने 31 सीटों पर बाजी मार ली। सबसे चौकाने वाला परिणाम राजद के लिए रहा क्‍योंकि उन्‍होंने कुल 4 सीटें जीत कर कांग्रेस व जदयू को अंगूठा दिखा गए।

झारखंड में भी भाजपा ने 14 लोकसभा सीट में से 12 पर कब्‍जा जमा लिया है। अब इन राज्‍यों में भाजपा का प्रभाव ज्‍यादा हो गया है और क्षेत्रिय पार्टियों को मुंह दिखाने लायक भी नहीं छोड़ा है। यहां तक की, वो अब चाहकर भी भाजपा व एनडीए में शामिल में नहीं हो सकते। अब वो अपने आप को कोस रहे होगें कि ये मैने क्‍या किया।

सबसे बड़ा झटका मोदी के धूरविरोधी नीतिश कुमार को लगा है। नीतिश कुमार के कारण ही जदयू ने 15 जून 2013 को भाजपा के अपने 17 साल के पुराने रिस्‍ते को ताक पर रख उससे अपना नाता यह कह तोड़ दिया था कि अगर भाजपा मोदी को प्रधानमंत्री बनाती है तो हम भाजपा के साथ नहीं रह सकते। नीतिश पर इस लोकसभा चुनाव में हार का खामियाजा 2015 में राज्‍य में होने वाले विधानसभा पर पड़ सकता है। अब राज्‍य में जदयू की सरकार भी खतरे में पड़ गई है, अगर उसके कुछ विधायकों ने उनका साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया तो इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

अब नीतिश कुमार के पास केवल दो ही रास्‍ते बचें है। एक तो वो भाजपा से माफी मांगते हुए एनडीए में शामिल हो जाएं और राज्‍य व केंद्र में अपने व अपनी पार्टी का आस्तित्‍व बचाने का प्रयास करें, जो संभव नहीं दिखता है। नीतिश कुमार के पास दूसरा रास्‍ता यह है कि वो अपने फैसले पर पूर्नविचार करें और इस हार में कहां कमी रह गई है उसे दूर करने की जितनी जल्‍दी प्रयास करें, उनके लिए सार्थक होगा। वहीं वो केंद्र में मोदी की सरकार के साथ भी सकारात्‍मक सोंच दिखाकर अपनी राजनीतिक अनुभवों के आधार पर राज्‍य को एक नई पहचान दें, तो शायद राज्‍य की जनता उन्‍हें माफ कर दे।


हालांकि ऊपर की दोनो ही परिस्तिथियों में नीतिश कुमार इतनी जल्‍दी सफल नहीं हो पाएंगे। ऐसी स्थिति में राज्‍य के 2015 में होने वाले चुनाव में इस हार की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है और बिहार के इतिहास में कभी राज्‍यसत्‍ता में नहीं नहीं आने वाली भाजपा चुनाव जीत कर राज्‍य में सरकार बना सकती है। इस तरह नीतिश कुमार अकेले पड़ जाएंगे, जो ना सरकार में रह पाएंगे और न विपक्ष में। अब फैसला नीतिश कुमार को करना है कि वो कौन सा कदम उठाते हैं और कौन सी रणनीति के तरह चुनावी मैदान में आते हैं। 

Monday, 31 March 2014

कांग्रेस ने 60 सालों में देश को बेच दिया – इंद्रेश कुमार

राकेश कुमार

30 मार्च 2014 को मैं पहली बार संघ के किसी कार्यक्रम में गया। विषय था ‘मेरा वोट देश के लिए’ एक विचार मंथन। इसी विषय पर इंदौर के माई मंगेशकर सभागृह में संघ द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसके मुख्‍य वक्‍ता थे मध्‍यप्रदेश संघ के प्रवक्‍ता इंद्रेश कुमार। कार्यक्रम में बहुत सारे लोग आए हुए थे। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 600 सीटों वाली वह सभागृह पूरी तरह से भरा हुआ था।

दो घंटे के इस कार्यक्रम में उन्‍होंने कांग्रेस और आप को जमकर कोसा और मोदी का गुणगान किया। उन्‍होंने तो विषय पर केवल 2 मिनट ही बोला मगर पहले को किसी पार्टी व नाम के बिना ही उसकी खिचाई कर रहे थे, बाद में वो पार्टी व नेता का नाम भी लेने लगे। उनके अनुसार देश में सबसे ज्‍यादा लोकप्रिय नेता मोदी है, इसलिए हमने उसे प्रधानमंत्री का उम्‍मीदवार बनाया। इंद्रेश कुमार के अनुसार जब मोदी के सामने आडवाणी, जसवंत, राजनाथ, सुषमा व जेटली तक नहीं टिक सकते तो नीतिश कुमार, मुलायम, ममता, सोनिया, राहुल व मनमोहन क्‍या टिकेंगे?
                                                                            
इंद्रेश कुमार का कहना था कि नरेन्‍द्र मोदी आज के चुनाव का वह महाराथी है जिसके सामने आने से दूसरे दल के नेता व महारथी मैदान में आने से घबराते हैं। इसी डर से तो वो अपने प्रधानमंत्री का उम्‍मीदवार घोषित नहीं कर रहें हैं। वो आज के समय के इस चुनावी महाभारत के अर्जुन हैं।

उन्‍होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा की 60 सालों के शासन में कांग्रेस के नेताओं ने देश को बेच दिया है। हमारे मान सम्‍मान, सुरक्षा और जीने की गांरटी अधिकार को भी छिन लिया है। उनके ही शासन काल में पाकिस्‍तान और चीन ने हमसे हमारी जमीन छिन लिया है और हमे गुलाम बना दिया है। उन्‍होने कहा कि मनमोहन सिंह अपने आप को बहुत बडा अर्थशास्‍त्री मानते है तो आज एक डॉलर की कीमत 65 रुपया क्‍यों हैं जबकि आजादी के समय एक डॉलर की कीमत 1 रुपया था।

उन्‍होने आप पर कमेंट करते हुए एक चुनावी व्‍यंग्‍य कहा। उन्‍होंने कहा कि केजरीवाल को सभाएं खत्‍म होने के बाद कोई खाने तक नहीं पुछता। उन्‍हें तो बस इसी का इंतजार रहता है कि कोई कार्यकर्ता आए और उनसे खाने के लिए पूछे। वहीं दूसरी तरफ मोदी को खाने की फुर्सत नही है। वो तो सभाएं करते करते यह भूल जाते है कि उन्‍हें भुख भी लगी है।
उनहोंने अपने अंतिम वाक्‍य में आज के इस चुनाव में हम सभी को वोट देना चाहिए। क्‍योंकि आपका वोट ही हमें कांग्रेस के अत्‍याचारों से मुक्‍ती दिला सकती है और हमें जीने की गारंटी दे सकती है, हमारा मान-सम्‍मान लौट सकता है, हमारे सैनिक मान-सम्‍मान के साथ जी सकते हैं। अगर इस बार हम चुके तो फिर हमारे जीने की गारंटी कोई नहीं देगा। यह गांरटी केवल मोदी दे सकता है। इसलिए मोदी को सत्‍-प्रतिशत वोट दें।


यानी कुल मिलाकर कहा जाय तो उन्‍होंने मोदी की तारिफ की और वोट भी मोदी को देने का आह्वान किया। लेकिन उन्‍होंने आडवाणी, सुषमा, जेटली और राजनाथ सिंह को मोदी के साथ खड़ा होने वाला सिपाही करार दिया और मोदी को टीम का नेता, जो इन्‍हें अपने अनुसार पार्टी की रणनी‍ति तय करता है। 

Wednesday, 5 March 2014

ट्रेन का सफरनामा

मैं कल अपने गांव से इंदौर लौट रहा था। मैंने भोपाल से इंदौर के लिए शाम को करीब 5 बजे इंटरसीटी ट्रेन का इंदौर के लिए टिकट लेकर समान्‍य कोच में बैठ गया। शायद मैं बहुत दिनों के बाद किसी भी ट्रेन के समान्‍य कोच में बैठा था। ट्रेन इंदौर के लिए चल पड़ी। ट्रेन में बहुत भीड़ थी। मैं ट्रेन में बैठे लोगों के गतिविधियों को देखने लगा। मेरे बगल में ही कुछ विद्यार्थी किसी कॉलेज में लौट रहें थे। उन्‍होंने अपना सफर को खुशनुमा बनाने के लिए आपस में ही तीन ग्रुप में बंट गए। दो ग्रुप अंताबछड़ी(गानों की प्रतियोगिता) खेलने में व्‍यस्‍त हो गया जिसका साथ कोच में खड़े लोग व महिलाएं भी दे रही थी। सभी को लोगों को बहुत ही मजा आ रहा था। वहीं दुसरा ग्रुप पहले तो उस दिन का पुरा हिसाब करता रहा मगर उसके बाद वो विज्ञान व समान्‍य ज्ञान के बातों में लग गए। उन्‍हें अपने अन्‍य ग्रुप की तरह अन्‍य लोगों का साथ नहीं मिल रहा था। इसके बावजुद वो आपस में इस दूसरे का ज्ञानवर्धन कर रहे थे। इसी दौरान कभी चाय, कॉफी, चने, चना चटपटा, तथा चिप्‍स व पॉपकॉन बेचने वाले भी आ जाते थे। इसी बीच एक मनुष्‍य की तीसरी लिंग(छक्‍का) आकर लोगों से जबरन पैसे वसुलने लगे।

ट्रेन अबतक मक्‍सी स्‍टेशन पार कर चुकी थी। पहले दोनों ग्रुपों ने अपना खेल खत्‍म कर आपस में फोटो खिचने में वयस्‍त हो गए। इस दौरान तीसरा ग्रुप में शामिल हो गया। वहीं दुसरी तरफ कुछ लोग सीट के लिए आपस में लड़ बैठे। दोनों ही एक-दूसरे पर धक्‍का देने का आरोप लगा रहे थे। दोनों की लड़ाई इतनी तेज हो रही थी की वहां उपस्थित सभी लोगों का ध्‍यान वहां आ गया था और कुछ लोग तो उन्‍हें लड़ने से बचा भी रहे थे। बात तब और बिगड़ गई जब उन्‍हे रोकने गई एक महीला को ही अपशब्‍द सूनने पड़े। अबतक देवास स्‍टेशन आ गया था।


अब सभी लोग ट्रेन के जल्‍द से जल्‍द इंदौर पहुंचने की प्रतिक्षा कर रहे थे। ट्रेन आखिरकार 10 बजे इंदौर पहुंच गई और सभी अपने घर की ओर निकल पड़े। मैं भी होटल से खाना पैक करा कर स्‍टेशन से ऑटो लेकर अपने घर की ओर निकल गया। बहुत दिनों के बाद हुई इस समान्‍य कोच का सफर कई मायनों में यादगार हो गया जहां मैंने देखा भी लोग आज भी ट्रेन और बसों में सीट के लिए लड़ते है और उस सीट पर किसी और व्‍यक्ति को बैठने नहीं देते हैं वहीं वर्षो पुरानी चली आ रही खेल आज भी ट्रेन की इस समान्‍य कोच के माध्‍यम से जारी है। 

Tuesday, 11 February 2014

केजरीवाल की नौटंकी समापन की ओर



शहर में जब भी नौटंकी वाला आता है तो वह अलग-अलग नौटंकी कर लोगों का मन बहलाता है, लोग हंसते हैं और उसपर पैसा लुटाते हैं। लेकिन कुछ समय बाद नौटंकी खत्‍म हो जाता है तो लोग अपने-अपने घर चले जाते हैं। ठीक उसी तरह भारतीय राजनीति में एक नौटंकी वाला राजनितिज्ञयों का मनोरंजन कर रहा है। हालांकि लगता है अब उसके नौटंकी खत्‍म होने जा रही है। उसमें सबसे बड़ा योगदान रहा मीडिया का जो चुनाव से पूर्व से लेकर अबतक आप की नौटंकी को देश को दिखाता रहा। हम आपको बता रहें है दिल्‍ली के सबसे बड़े राजनीतिक नौटंकी पार्टी आप के समय के साथ नौटंकी का सफर।

राजनीति में उस समय भुचाल आ गया जब दिल्‍ली में आप ने विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीत कर भाजपा और कांग्रेस से सत्‍ता से दूर रखा। केजरीवाल चुनाव से पूर्व कहते थे कि मैं किसी भी सूरत में कांग्रेस और भाजपा से गठबंधन नहीं करुंगा। इसके लिए उन्‍होनें अपने बच्‍चों की भी कसम खाई। सभी पार्टियों का भ्रष्‍ट कहा और कांग्रेस को भ्रष्‍टा‍चारियों का मुखिया कहा। बाद में उसी भ्रष्‍ट पार्टी के साथ मिलकर दिल्‍ली की सरकार बनाई।

चुनाव खत्‍म हुआ और आप 28 सीटें जीत दिल्‍ली की दूसरी सबसे बड़ी बनी। कांग्रेस को केवल 8 सीटें मिली वहीं भाजपा को 32 सीटें मिली। निर्दलीय व अन्‍य पार्टियों के खाते में 5 सीटें गई। भाजपा जब दिल्‍ली में सरकार नही बना पाई और कांग्रेस ने आप को समर्थन देने की बात कही तो केजरीवाल जनता के बीच जाकर लोगों से पूछा कि क्‍या उन्‍हें कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनानी चाहिए की नही। इसके लिए उन्‍होंने सोशल साइट्स का भी सहारा लिया। बाद में खुद के फैसलों को जनता का फैसला बता 21 दिन बाद यानी 29 दिंसबर को दिल्‍ली में कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाई।

केजरीवाल दिल्‍ली में सरकार बनाने से पूर्व कहा करते थे कि सत्‍ता में आने के बाद दिल्‍ली के सभी भ्रष्‍टा‍चारियों का सजा दिलवाएंगे और सत्‍ता बनने के 14 दिनों के अंदर दिल्‍ली की पूर्व मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल की जांच कराएंगे और जनलोकपाल बिल बना लेंगे। सरकार बनाने के बाद केजरीवाल अब कहने लगे कि शीला के खिलाफ सबूत लाओं तभी उनके ऊपर जांच बैठाया जा सकता है। वहीं जनलोकपाल बिल 14 दिन बाद नहीं 1 महिने बाद लाया, वो भी असंवैधानिक प्रक्रिया के तहत।

आप जब दिल्‍ली में सरकार बनाने जा रही थी तब केजरीवाल ने कहा था कि वो मुख्‍यमंत्री नहीं बनेंगे, लेकिन बाद में अपना फैसला बदल दिया। दूसरे को नसीहत देने वाली आप स्‍वंय को सुधार नहीं पा रही है। दिल्‍ली सरकार के कानून मंत्री सोमनाथ भारती के ऊपर इतावली महिलाओं के घर पर जबरन छापा मारने, उन्‍हें देह धंधे के आरोप में फंसाने को लेकर देश के सभी राजनीतिक उनकी आलोचना कर चुकें है, फिर भी केजरीवाल चुप रहे। केजरीवाल के मुख्‍यमंत्री बनते ही दिल्‍ली में पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ गए। टेक्‍सी व ऑटों वालों ने जब इसकी शिकायत केजरीवाल से की तो उन्‍होंने अप्रत्‍यक्ष्‍ा रुप से केंद्र को जिम्‍मेदार ठहराकर अपनी जिम्‍मेदारी से बच निकले।

केजरीवाल मुख्‍यमंत्री बनने के बाद 20 जनवरी को दिल्‍ली पुलिस के रवैए को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए जो पूरी तरह असंवैधानिक था। केजरीवाल का कहना था कि घरने पर बैठने का आज्ञा हमारा संविधान भी देता है। केजरीवाल को समझना चाहिए कि हमारा संविधान किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्‍यक्ति को घरने व आंदोलन करने की अनुमति नहीं देता है। अगर वह घरने पर ही बैठना चाहता है तो पहले वह संवैधानिक पद त्‍यागे, फिर वह स्‍वतंत्र है किसी भी भी तरह के धरने व आंदोलन करने के लिए।

आप ने अपने 28 विधायक, 8 कांग्रेस और एक जदयू विधायक के साथ मिलकर दिल्‍ली में 29 दिसंबर को सरकार बनाया था। लोकसभा चुनाव व वर्तमान सरकार में महत्‍वपूर्ण पद नहीं मिलने के कारण असंतुष्‍ट विधायक बिन्‍नी ने पार्टी से नाता तोड़ लिया और सोमवार को निर्दलीय विधायक रामवीर शौकिन ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। अब आप के पास कुल 35 विधायको का समर्थन प्राप्‍त है, जो स्‍पष्‍ट बहुमत से एक कम है। ऐसे में आप की सरकार कभी भी सत्‍ता से बेदखल हो सकती है।

दिल्‍ली सरकार पहले ही मुश्किलों में थी, जब केजरीवाल ने जनलोकपाल बना कर उसे विधानसभा में पारित कराने और उसे लागू करने के लिए कड़े निर्णय यानी पद छोड़ने जैसी धमकियां भी दे चुके हैं। सरकार और कानून विशेषज्ञों का मानना है कि जब दिल्‍ली कोई पूर्ण राज्‍य ही नहीं है तो वहां की सरकार केंद्र के अधीन होता है और दिल्‍ली की सरकार कोई कानून बनाने से पूर्व केद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति लेनी होती है। ऐसे में केजरीवाल की धमकी व निर्णय गलत है।

यानी 8 दिसंबर 2013 से लेकर अबतक केजरीवाल ने 8 तरह की नौटंकी दिखाई जिसपर राजनीतिक दल के साथ लोगों ने भी खुब एंजाऍ किया। इस नौटंकी को हर समय मीडिया ने लाइभ दिखाया जिसके कारण लोगों का मन खुब बहला। अब लगता है केजरीवाल के पास नौटंकी करने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए वो बच्‍चों वाली धमकियां देकर केंद्र सरकार और देश के लोगों को भ्रमित करना चाहते है। अब आगे देखते हैं उनकी यह नौटंकी और धमकी कितने दिनों तक उनका साथ देती है।

Tuesday, 28 January 2014

यह कैसी गरीबी!

आज(28 जनवरी 2014) सूबह-सूबह, करीब 8 बजे, मैं अपने कॉलोनी से बाहर टहलने के लिए निकला। जब मुख्‍य रोड़ (एबी रोड) पहुंचा तो देखा की कॉलोनी से जुड़े इस रोड़ के पास स्थित नगर निगम जोन ऑफिस के बाहर तीन-चार महंगी गाडि़यां (दो पहीए और चार पहीए) सहित कई गाडि़यां खड़ी थी और बहुत सारे लोग जोन के अंदर और बाहर बहुत सारे लोग खड़े थे। मैं समझा सूबह-सूबह कोई नेता आया है। अचानक मुझे याद आया, आज तो मंगलवार है और इंदौर में हर मंगलवार को गरीबों के लिए बीपीएल का कार्ड बनता है। इसलिए लोग अपना कार्ड बनवाने के लिए लाईन में खड़े हैं जिसमें महिलाएं, बूजुर्ग और बच्‍चें भी शामिल हैं।

पिछले मंगलवार को इंदौर नगर निगम के नेहरु नगर और सुखलिया स्थित जोन पर बीपीएल कार्ड बनवाने के लिए खड़े महिलाओं एवं पुरुषों पर पुलिस ने लाठीचार्च किया था जिसके कारण आज कार्ड नहीं बन रहा है। फिर भी लोगों की लंबी लाइनें लगी हुई थी।  

लाइन में लगे सभी व वहां पर उपस्थित सभी लोग अपना बीपीएल कार्ड बनवाना चाहते थे। जोन में आज कार्ड नहीं बनने के कारण्‍ वे सभी लोग उदास इस प्रतिक्षा में खड़े थे की शायद देर से ही सही कार्ड बनना शुरू हो जाए। मैं उन सभी लोगों को ध्‍यान से देखने लगा। वहां पर उपस्थित लगभग 400 लोगों में से लगभग 300 लोगों ने महंगे कपड़े पहन रखे थे। पुरुषों के शरीर पर लगभग 1000 रुपए की कोर्ट तथा महिलाओं ने लगभग 500 रुपए वाली साडि़यां पहन रखी थी। (आज कोई भी कोर्ट 1000 रुपए तथा साड़ी 500 रुपए से नीचे पर नहीं मिलती है।) साथ- ही-साथ जोन के बाहर कई मोटरसाईकल लगी हुई थी। (आज एक मोटरबाईक की कीमत कम से कम 40000 रुपए है।)

जोन के पास और अंदर खड़े लोगों से मैने बात की तो वो कहने लगे, हम तो भईया, बहुत गरीब है, रहने को आवास नही, खाने के लिए दो वक्‍त की रोटी नही, कमाई का कोई साधन नही, तथा पहनने के लिए कपड़ा तक नहीं है। हम ठंड में भगवान के भरोसे रहते हैं। इसी तरह की बाते सभी लोग कर रहे थे। उनका कहना था कि हम अब इस बीपीएल कार्ड के भरोसे हैं जिससे हमें दो वक्‍त का भोजन तो प्राप्‍त होगा। फिर मैं उनलोगों को आज कार्ड नहीं बनने की सूचना देकर उन्‍हें घर जाने को कह मैं भी वहीं पास के ठेले पर चाय पीने लगा।

चाय पीते-पीते मैं सोंच रहा था कि आखिर यह कौन सी ऐसी चीज है जिसे पाने के लिए लोग गरीबी का चोला पहन लेते हैं? उन्‍हें थोडी सी भी शर्म नहीं आती है गरीबों का हक मारने में। ठेले के पास बैठे कुछ लोग कह रहे थे की जिसकी थोडी प्रशासन और नेताओं के पास पहुंच है, उसका तो कार्ड बन ही जाएगा। क्‍या इससे गरीबों का हक प्राप्‍त हो पाएगा? क्‍या वो किसी भी सरकारी मुफ्त योजनाओं का लाभ उठा पांएगे?

इन्‍ही सब प्रश्‍नों का उत्‍तर ढूंढ रहा था, तभी मेरी चाय खत्‍म हो गई और मैं यह सोंच कर वहां से जाने लगा कि यह तो मानसिक गरीबी है, इसे कोई नहीं बदल सकता। हर धनवान को गरीबों का हक मारने में मजा आता है और उन्‍हें मुफ्त में मिल रही सुविधाओं को छिन कर उन्‍हें रास्‍ते पर और भीख मांगकर अपना गुजारा करने पर मजबुर कर देते हैं।

अब आप ही बताएं क्‍या कभी इस तरह की गरीबी भारत से खत्‍म होगी? और हां आप लोग भी उन लोगों से यह सवाल जरुर पूछें जिसके पास सब तरह की सुविधाएं रहने के बाद भी हर समय कहते रहते हैं कि हम सबसे गरीब है, कि वो गरीबों का मजाक क्‍यों उडा रहे हैं? अगर आप चैन ने नहीं बैठ सकते तो कृपया कर उन्‍हें तो कम-से-कम चैन से भीख मांगकर ही चैन से खाना खाने और फूटपाथ पर सोने तो दें।

Tuesday, 14 January 2014

कानून केवल महिलाओं के लिए क्यों ??



तीन दिन पूर्व मैं रायपूर गया था। स्‍टेशन से कुशाभाउ ठाकरे विश्‍वविद्यालय जाने के लिए सिटी बस और ऑटों का इंतजार करने लगा। तभी एक व्‍यक्ति ने बताया कि कुशाभाउ ठाकरे विश्‍विद्यालय के लिए सीधे कोई ऑटो या सिटी बस नहीं जाती है। आपको पहले घड़ी चौक, पंचमडी, भाटा गांव चौक और फिर वहां से आपको ऑटो बुक करके विश्‍वविद्यालय जाना होगा।

मैं अपने दोस्‍त के साथ स्‍टेशन से सिटी बस में सवार होकर घडी़ चौक जाने लगा। बस में एक 18 साल की लड़की चढ़ी और आगे की गेट के पास खड़ी हो गई। जब बस चलने लगी तो बस के ड्राइवर और कंडक्‍टर ने उसे खाली सीट पर बैठने को कहा, तो अपनी कुछ परेशानी बताकर सीट पर बैठने से मना कर दिया। कंडक्‍टर ने उसे गेट से थोडा पीछे हटकर खड़ा होने का निवेदन किया जिसे लड़की ने नकार दिया।

जब बस के ड्राइवर और कंडक्‍टर ने उसे कड़े शब्‍दों में डांटकर उसे बस से नीचे उतरने, सीट पर बैठने तथा गेट से पीछे खड़े होने का कहा तो वह लड़की बदतमीजी पर उतर आई। बस के सभी सवारियों ने लड़की को बहुत समझाने का प्रयास किया, मगर वह नहीं मानी। तबतक हमारा स्‍टॉप आ गया था। हम वहां से एक ऑटो पर बैठ पंचमडी जाने लगे।
मेरे साथ बैठे दोस्‍त ने मुझसे कहा कि बस का कंडक्‍टर लड़की से कितनी बदतमीजी से बात कर रहा था, मेरा मन कर रहा था कि उस बस कंडक्‍टर को जोरदार थप्‍पड मारू। मैने भी दोस्‍त को जवाब दिया कि लड़की कितनी बदतमीजी से बात कर रही थी उसको, तुमने नहीं सुना, तो उसने मेरी बात को काटते हुए कहा कि कुछ भी हो कंडक्‍टर और ड्राइवर को 
लड़की से इस तरह बर्ताव नहीं करना चाहिए।

मैं दोस्‍त की बात सुन चौक गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उसका मैं क्‍या जवाब दूं। लेकिन मेरे दिमाग मे यह प्रश्‍न खड़ा हो गया कि क्‍या पुरुषों को ही शिष्‍टाचार निभानी चाहिए, लड़कियों को नहीं? क्‍या लड़कियां ही बदतमीजी से बात कर सकती है और पुरुष नही? क्‍या सभी देश में लगातार बढ़ रहे यौन उत्‍पीडन के मामले में पुरुष ही दोषी हैं, महिलाएं नहीं?   

इसी प्रश्‍न का उत्‍तर ढूढ़ रहा था तभी मध्‍यप्रदेश के इंदौर में वर्ष 2013 में फरवरी से लेकर दिंसबर तक होने वाले यौन उत्‍पीडन के कुछ मामले मुझे याद आने लगे जिसमें, 10 पुलिस रिपोर्ट ऐसे थे, जिसमें महिला ने अपनी दबंगई दिखाने के लिए पुरुष पर यौन उत्‍पीडन के आरोप लगाए थे। एक मामला ऐसा था कि जब किराए से रह रही महिला से जब मकान मालिक ने किराया मांगा तो, उसने मालिक के ऊपर यौन उत्‍पीडन जैसे गंभीर आरोप लगा दिए।

हमारा कानून भी इस तरह के आरोपों में सच्‍चाई जानने का प्रयास नहीं करने देता है जिससे, एक बेगुनाह व्‍यक्ति सलाखों के पीछे चला जाता है। इंदौर के मामले में जेल से छुटने के बाद मकान मालिक ने खुदकुशी कर ली, जब जांच हुई तो उसके खिलाफ लगे आरोप गलत निकले। इस तरह के कई आरोप रोज भारत में पुरुषों पर लगाए जाते हैं जिनमें से 50 फीसदी आरोप गलत होते हैं।

मैं किसी पुरुष को इस तरह के आरोपों से बचाने का प्रयास नहीं कर रहा हूं और ना ही किसी महिला पर हुए अत्‍याचार को गलत बता रहा हूं। मगर यह प्रश्‍न अवश्‍य कर रहा हूं कि उसके द्वारा लगाए गए इस तरह के गंभर आरोप में कितनी सच्‍चाई है? अगर कोई महिला किसी पुरुष का यौन उत्‍पीडन करती है तो उसके ऊपर भारतीय संविधान के किस धारा के तहत दंड दिया जा सकता है? यह प्रश्‍न बहुत ही गलत हो सकता है, मगर रायपुर में मेरे दोस्‍त द्वारा बदतमीजी कर रही लड़की का पक्ष लेने से मुझे काफी दुख हुआ और इंदौर के घटना ने मुझे समाज से और भारतीय कानून से यह प्रश्‍न करने को मजबुर कर दिया।

महिलाओं के लिए भारत में कई तरह के कानून हैं जिसका प्रयोग कर वह पुरुष को सलाखों के पीछे डाल सकती है, मगर भारत में पुरुषों की रक्षा के कौन सा कानून है?

आप सभी को एतराज फिल्‍म याद ही होगा जिसमें प्रियंका चोपडा अपने पद का प्रयोग कर अक्षय कुमार पर किस तरह के यौन उत्‍पीडन के आरोप लगाए थे जिसमें पूरी गलती प्रियंका की थी, जो बाद में पेश हुए साक्ष्यों और गवाहों में साबित हुआ। हमारी भारतीय न्‍यायालय से अनुरोध है कि इस तरह के मामले में अंतिम फैसला देते समय मामले से संबंधित सभी साक्ष्‍य देख की ही फैसला दें नहीं तो हमेशा ही एक बेगुनाह नागरिक अपराधी साबित होगा और अपराधी खुल्‍लेआम सड़को पर घूमता नजर आएगा।