Tuesday, 11 February 2014

केजरीवाल की नौटंकी समापन की ओर



शहर में जब भी नौटंकी वाला आता है तो वह अलग-अलग नौटंकी कर लोगों का मन बहलाता है, लोग हंसते हैं और उसपर पैसा लुटाते हैं। लेकिन कुछ समय बाद नौटंकी खत्‍म हो जाता है तो लोग अपने-अपने घर चले जाते हैं। ठीक उसी तरह भारतीय राजनीति में एक नौटंकी वाला राजनितिज्ञयों का मनोरंजन कर रहा है। हालांकि लगता है अब उसके नौटंकी खत्‍म होने जा रही है। उसमें सबसे बड़ा योगदान रहा मीडिया का जो चुनाव से पूर्व से लेकर अबतक आप की नौटंकी को देश को दिखाता रहा। हम आपको बता रहें है दिल्‍ली के सबसे बड़े राजनीतिक नौटंकी पार्टी आप के समय के साथ नौटंकी का सफर।

राजनीति में उस समय भुचाल आ गया जब दिल्‍ली में आप ने विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीत कर भाजपा और कांग्रेस से सत्‍ता से दूर रखा। केजरीवाल चुनाव से पूर्व कहते थे कि मैं किसी भी सूरत में कांग्रेस और भाजपा से गठबंधन नहीं करुंगा। इसके लिए उन्‍होनें अपने बच्‍चों की भी कसम खाई। सभी पार्टियों का भ्रष्‍ट कहा और कांग्रेस को भ्रष्‍टा‍चारियों का मुखिया कहा। बाद में उसी भ्रष्‍ट पार्टी के साथ मिलकर दिल्‍ली की सरकार बनाई।

चुनाव खत्‍म हुआ और आप 28 सीटें जीत दिल्‍ली की दूसरी सबसे बड़ी बनी। कांग्रेस को केवल 8 सीटें मिली वहीं भाजपा को 32 सीटें मिली। निर्दलीय व अन्‍य पार्टियों के खाते में 5 सीटें गई। भाजपा जब दिल्‍ली में सरकार नही बना पाई और कांग्रेस ने आप को समर्थन देने की बात कही तो केजरीवाल जनता के बीच जाकर लोगों से पूछा कि क्‍या उन्‍हें कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनानी चाहिए की नही। इसके लिए उन्‍होंने सोशल साइट्स का भी सहारा लिया। बाद में खुद के फैसलों को जनता का फैसला बता 21 दिन बाद यानी 29 दिंसबर को दिल्‍ली में कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाई।

केजरीवाल दिल्‍ली में सरकार बनाने से पूर्व कहा करते थे कि सत्‍ता में आने के बाद दिल्‍ली के सभी भ्रष्‍टा‍चारियों का सजा दिलवाएंगे और सत्‍ता बनने के 14 दिनों के अंदर दिल्‍ली की पूर्व मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल की जांच कराएंगे और जनलोकपाल बिल बना लेंगे। सरकार बनाने के बाद केजरीवाल अब कहने लगे कि शीला के खिलाफ सबूत लाओं तभी उनके ऊपर जांच बैठाया जा सकता है। वहीं जनलोकपाल बिल 14 दिन बाद नहीं 1 महिने बाद लाया, वो भी असंवैधानिक प्रक्रिया के तहत।

आप जब दिल्‍ली में सरकार बनाने जा रही थी तब केजरीवाल ने कहा था कि वो मुख्‍यमंत्री नहीं बनेंगे, लेकिन बाद में अपना फैसला बदल दिया। दूसरे को नसीहत देने वाली आप स्‍वंय को सुधार नहीं पा रही है। दिल्‍ली सरकार के कानून मंत्री सोमनाथ भारती के ऊपर इतावली महिलाओं के घर पर जबरन छापा मारने, उन्‍हें देह धंधे के आरोप में फंसाने को लेकर देश के सभी राजनीतिक उनकी आलोचना कर चुकें है, फिर भी केजरीवाल चुप रहे। केजरीवाल के मुख्‍यमंत्री बनते ही दिल्‍ली में पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ गए। टेक्‍सी व ऑटों वालों ने जब इसकी शिकायत केजरीवाल से की तो उन्‍होंने अप्रत्‍यक्ष्‍ा रुप से केंद्र को जिम्‍मेदार ठहराकर अपनी जिम्‍मेदारी से बच निकले।

केजरीवाल मुख्‍यमंत्री बनने के बाद 20 जनवरी को दिल्‍ली पुलिस के रवैए को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए जो पूरी तरह असंवैधानिक था। केजरीवाल का कहना था कि घरने पर बैठने का आज्ञा हमारा संविधान भी देता है। केजरीवाल को समझना चाहिए कि हमारा संविधान किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्‍यक्ति को घरने व आंदोलन करने की अनुमति नहीं देता है। अगर वह घरने पर ही बैठना चाहता है तो पहले वह संवैधानिक पद त्‍यागे, फिर वह स्‍वतंत्र है किसी भी भी तरह के धरने व आंदोलन करने के लिए।

आप ने अपने 28 विधायक, 8 कांग्रेस और एक जदयू विधायक के साथ मिलकर दिल्‍ली में 29 दिसंबर को सरकार बनाया था। लोकसभा चुनाव व वर्तमान सरकार में महत्‍वपूर्ण पद नहीं मिलने के कारण असंतुष्‍ट विधायक बिन्‍नी ने पार्टी से नाता तोड़ लिया और सोमवार को निर्दलीय विधायक रामवीर शौकिन ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। अब आप के पास कुल 35 विधायको का समर्थन प्राप्‍त है, जो स्‍पष्‍ट बहुमत से एक कम है। ऐसे में आप की सरकार कभी भी सत्‍ता से बेदखल हो सकती है।

दिल्‍ली सरकार पहले ही मुश्किलों में थी, जब केजरीवाल ने जनलोकपाल बना कर उसे विधानसभा में पारित कराने और उसे लागू करने के लिए कड़े निर्णय यानी पद छोड़ने जैसी धमकियां भी दे चुके हैं। सरकार और कानून विशेषज्ञों का मानना है कि जब दिल्‍ली कोई पूर्ण राज्‍य ही नहीं है तो वहां की सरकार केंद्र के अधीन होता है और दिल्‍ली की सरकार कोई कानून बनाने से पूर्व केद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति लेनी होती है। ऐसे में केजरीवाल की धमकी व निर्णय गलत है।

यानी 8 दिसंबर 2013 से लेकर अबतक केजरीवाल ने 8 तरह की नौटंकी दिखाई जिसपर राजनीतिक दल के साथ लोगों ने भी खुब एंजाऍ किया। इस नौटंकी को हर समय मीडिया ने लाइभ दिखाया जिसके कारण लोगों का मन खुब बहला। अब लगता है केजरीवाल के पास नौटंकी करने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए वो बच्‍चों वाली धमकियां देकर केंद्र सरकार और देश के लोगों को भ्रमित करना चाहते है। अब आगे देखते हैं उनकी यह नौटंकी और धमकी कितने दिनों तक उनका साथ देती है।