Monday, 31 March 2014

कांग्रेस ने 60 सालों में देश को बेच दिया – इंद्रेश कुमार

राकेश कुमार

30 मार्च 2014 को मैं पहली बार संघ के किसी कार्यक्रम में गया। विषय था ‘मेरा वोट देश के लिए’ एक विचार मंथन। इसी विषय पर इंदौर के माई मंगेशकर सभागृह में संघ द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसके मुख्‍य वक्‍ता थे मध्‍यप्रदेश संघ के प्रवक्‍ता इंद्रेश कुमार। कार्यक्रम में बहुत सारे लोग आए हुए थे। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 600 सीटों वाली वह सभागृह पूरी तरह से भरा हुआ था।

दो घंटे के इस कार्यक्रम में उन्‍होंने कांग्रेस और आप को जमकर कोसा और मोदी का गुणगान किया। उन्‍होंने तो विषय पर केवल 2 मिनट ही बोला मगर पहले को किसी पार्टी व नाम के बिना ही उसकी खिचाई कर रहे थे, बाद में वो पार्टी व नेता का नाम भी लेने लगे। उनके अनुसार देश में सबसे ज्‍यादा लोकप्रिय नेता मोदी है, इसलिए हमने उसे प्रधानमंत्री का उम्‍मीदवार बनाया। इंद्रेश कुमार के अनुसार जब मोदी के सामने आडवाणी, जसवंत, राजनाथ, सुषमा व जेटली तक नहीं टिक सकते तो नीतिश कुमार, मुलायम, ममता, सोनिया, राहुल व मनमोहन क्‍या टिकेंगे?
                                                                            
इंद्रेश कुमार का कहना था कि नरेन्‍द्र मोदी आज के चुनाव का वह महाराथी है जिसके सामने आने से दूसरे दल के नेता व महारथी मैदान में आने से घबराते हैं। इसी डर से तो वो अपने प्रधानमंत्री का उम्‍मीदवार घोषित नहीं कर रहें हैं। वो आज के समय के इस चुनावी महाभारत के अर्जुन हैं।

उन्‍होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा की 60 सालों के शासन में कांग्रेस के नेताओं ने देश को बेच दिया है। हमारे मान सम्‍मान, सुरक्षा और जीने की गांरटी अधिकार को भी छिन लिया है। उनके ही शासन काल में पाकिस्‍तान और चीन ने हमसे हमारी जमीन छिन लिया है और हमे गुलाम बना दिया है। उन्‍होने कहा कि मनमोहन सिंह अपने आप को बहुत बडा अर्थशास्‍त्री मानते है तो आज एक डॉलर की कीमत 65 रुपया क्‍यों हैं जबकि आजादी के समय एक डॉलर की कीमत 1 रुपया था।

उन्‍होने आप पर कमेंट करते हुए एक चुनावी व्‍यंग्‍य कहा। उन्‍होंने कहा कि केजरीवाल को सभाएं खत्‍म होने के बाद कोई खाने तक नहीं पुछता। उन्‍हें तो बस इसी का इंतजार रहता है कि कोई कार्यकर्ता आए और उनसे खाने के लिए पूछे। वहीं दूसरी तरफ मोदी को खाने की फुर्सत नही है। वो तो सभाएं करते करते यह भूल जाते है कि उन्‍हें भुख भी लगी है।
उनहोंने अपने अंतिम वाक्‍य में आज के इस चुनाव में हम सभी को वोट देना चाहिए। क्‍योंकि आपका वोट ही हमें कांग्रेस के अत्‍याचारों से मुक्‍ती दिला सकती है और हमें जीने की गारंटी दे सकती है, हमारा मान-सम्‍मान लौट सकता है, हमारे सैनिक मान-सम्‍मान के साथ जी सकते हैं। अगर इस बार हम चुके तो फिर हमारे जीने की गारंटी कोई नहीं देगा। यह गांरटी केवल मोदी दे सकता है। इसलिए मोदी को सत्‍-प्रतिशत वोट दें।


यानी कुल मिलाकर कहा जाय तो उन्‍होंने मोदी की तारिफ की और वोट भी मोदी को देने का आह्वान किया। लेकिन उन्‍होंने आडवाणी, सुषमा, जेटली और राजनाथ सिंह को मोदी के साथ खड़ा होने वाला सिपाही करार दिया और मोदी को टीम का नेता, जो इन्‍हें अपने अनुसार पार्टी की रणनी‍ति तय करता है। 

Wednesday, 5 March 2014

ट्रेन का सफरनामा

मैं कल अपने गांव से इंदौर लौट रहा था। मैंने भोपाल से इंदौर के लिए शाम को करीब 5 बजे इंटरसीटी ट्रेन का इंदौर के लिए टिकट लेकर समान्‍य कोच में बैठ गया। शायद मैं बहुत दिनों के बाद किसी भी ट्रेन के समान्‍य कोच में बैठा था। ट्रेन इंदौर के लिए चल पड़ी। ट्रेन में बहुत भीड़ थी। मैं ट्रेन में बैठे लोगों के गतिविधियों को देखने लगा। मेरे बगल में ही कुछ विद्यार्थी किसी कॉलेज में लौट रहें थे। उन्‍होंने अपना सफर को खुशनुमा बनाने के लिए आपस में ही तीन ग्रुप में बंट गए। दो ग्रुप अंताबछड़ी(गानों की प्रतियोगिता) खेलने में व्‍यस्‍त हो गया जिसका साथ कोच में खड़े लोग व महिलाएं भी दे रही थी। सभी को लोगों को बहुत ही मजा आ रहा था। वहीं दुसरा ग्रुप पहले तो उस दिन का पुरा हिसाब करता रहा मगर उसके बाद वो विज्ञान व समान्‍य ज्ञान के बातों में लग गए। उन्‍हें अपने अन्‍य ग्रुप की तरह अन्‍य लोगों का साथ नहीं मिल रहा था। इसके बावजुद वो आपस में इस दूसरे का ज्ञानवर्धन कर रहे थे। इसी दौरान कभी चाय, कॉफी, चने, चना चटपटा, तथा चिप्‍स व पॉपकॉन बेचने वाले भी आ जाते थे। इसी बीच एक मनुष्‍य की तीसरी लिंग(छक्‍का) आकर लोगों से जबरन पैसे वसुलने लगे।

ट्रेन अबतक मक्‍सी स्‍टेशन पार कर चुकी थी। पहले दोनों ग्रुपों ने अपना खेल खत्‍म कर आपस में फोटो खिचने में वयस्‍त हो गए। इस दौरान तीसरा ग्रुप में शामिल हो गया। वहीं दुसरी तरफ कुछ लोग सीट के लिए आपस में लड़ बैठे। दोनों ही एक-दूसरे पर धक्‍का देने का आरोप लगा रहे थे। दोनों की लड़ाई इतनी तेज हो रही थी की वहां उपस्थित सभी लोगों का ध्‍यान वहां आ गया था और कुछ लोग तो उन्‍हें लड़ने से बचा भी रहे थे। बात तब और बिगड़ गई जब उन्‍हे रोकने गई एक महीला को ही अपशब्‍द सूनने पड़े। अबतक देवास स्‍टेशन आ गया था।


अब सभी लोग ट्रेन के जल्‍द से जल्‍द इंदौर पहुंचने की प्रतिक्षा कर रहे थे। ट्रेन आखिरकार 10 बजे इंदौर पहुंच गई और सभी अपने घर की ओर निकल पड़े। मैं भी होटल से खाना पैक करा कर स्‍टेशन से ऑटो लेकर अपने घर की ओर निकल गया। बहुत दिनों के बाद हुई इस समान्‍य कोच का सफर कई मायनों में यादगार हो गया जहां मैंने देखा भी लोग आज भी ट्रेन और बसों में सीट के लिए लड़ते है और उस सीट पर किसी और व्‍यक्ति को बैठने नहीं देते हैं वहीं वर्षो पुरानी चली आ रही खेल आज भी ट्रेन की इस समान्‍य कोच के माध्‍यम से जारी है।