Monday, 23 February 2015

ट्रैफिक सुरक्षा को लेकर हम कितने जागरुक !!

राकेश कुमार

जब भी सड़क पर जाम लगता है, दुर्घटना होती है और कुछ इसी तरह की गतिविधियां होती है तो सबसे पहले ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन को दोष देते हैं और कहते हैं कि पुलिस और ट्रैफिक पुलिस कार्य नहीं करना चाहती। लेकिन क्या हम जानते हैं कि सड़क पर लगने वाले जाम और होने वाले दुर्घटना के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं?

जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस तो हमेशा ही सड़कों पर लगने वाले जाम और दुर्घटना को रोकना चाहती है और इसके लिए वो समय-समय पर जागरुकता अभियान, सड़कों पर जागरुकता संदेश, आकाशवाणी, रेडियो तथा समाचार पत्रों के माध्यम से जागरुक करती रहती है। मगर हम उसपर कभी ध्यान नहीं देते और अपने काम में लगे रहते हैं। भारत सरकार ने इसके लिए कुछ जरुरी नियम भी बना रखें हैं।

ट्रैफिक नियम के अनुसार, तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना, नशा कर गाड़ी चलाना, दो पहिया वाहनों पर दो से ज्यादा लोगों का बैठना, किसी भी प्रकार की गाड़ी चलाते समय मोबाईल का प्रयोग करना, 18 वर्ष के कम युवाओं का दो-पहिया या चार पाहिया वाहन का चलाना, चार पहिया वाहन चालक द्वारा सीट बेल्ट का प्रयोग ना करना, दो पहिया वाहन चालक का हेमलेट का प्रयोग ना करना, ट्रैफिक सिग्नल का पालन ना करना तथा लेन में उल्टी साईड गाड़ी चलाना और जेबरा क्रासिंग को नजरअंदाज करना कानूनन अपराध है। इसके लिए हमारे कानून में कड़ी सजा व जुर्माना का प्रावधान है।

उपरोक्त दिए गए ट्रैफिक नियमों को हम अच्छी तरह जानते भी हैं, मगर उसका पालन नहीं करते। अक्सर हम वाहन चालक को यह दलील देते हुए सुनते हैं कि, सर हम थोड़ी जल्दी में हैं। कुछ लोग तो अपने पद व अपनी पहुंच का प्रयोग कर ट्रैफिक पुलिस के सदस्यों को अपना धौंस खौफ दिखाते हैं। हम यह भी जानते हैं कि हमारी थोड़ी सी लापरवाही पैदल चल रहे यात्रियों, अन्य लोगों के साथ-साथ अपनी जींदगी भी दांव पर लगा लेते हैं।

हमारी इतनी जागरुकता के बाद भी हम अपनी गलतियों को दुहराते रहते हैं और कभी भी ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते। वाहन चालकों को लाख समझाने पर जब चालक नहीं मानते हैं तो ट्रैफिक पुलिस प्रशासन ने जागरुकता अभियान चलाया, स्कूलों, कॉलेजों के बच्चों के साथ समाज के वरिष्ठ नागरिकों का सहयोग लेना शुरु किया। आखिर ट्रैफिक प्रशासन को इस तरह के जागरुकता अभियान चलाने की क्या जरुरत पड़ी?

भारतीय ट्रैफिक प्रशासन कंट्रौल विभाग, नई दिल्ली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल लगभग 1,35000 लोग सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं और वर्ष 2013 में सड़क दुर्घटना का कुल आंकड़ा 5 लाख को पार कर गया। इस रिपोर्ट में सड़क दुर्घटना के अलग-अलग तरीकों से मरने वालों को मिलाकर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। जिसे लेकर सरकार और ट्रफिक पुलिस की काफी खिचाई होती है। इसलिए पुलिस प्रशासन को इस तरह की जागरुकता अभियान चलाने की जरुरत पड़ी।

हम कबतक दूसरों को दोष देते रहेंगे ? हम अपने आप मे सुधार क्यों नहीं करना चाहते?, क्या हम अब भी मानते हैं कि सड़क जाम और दुर्घटना के लिए ट्रैफिक पुलिस  और प्रशासन जिम्मेदार है? इस सवाल का जवाब आपके पास है। अब देखना यह है कि आप यातायात के नियमों का पालन करते  हैं या यातायात दुर्घटना की रिपोर्ट में अपना नाम दर्ज कराते हैं......