Friday, 12 June 2015

इंतजार की हद कहां तक?

राकेश कुमार


  एक कहावत है ‘इंतजार का फल मीठा होता है’। वाकई, इंतजार का फल मीठा होता है मगर ज्यादात्तर समय इसका अनुभव कड़वा ही होता है। इंतजार बहुत ही छोटा शब्द हैं मगर इसका अर्थ बहुत ही बड़ा होता है। जैसे समुद्र तो लिखने और पढ़ने में बहुत ही छोटा होता है मगर जब हम उसे वास्तवीक रुप में देखते हैं तब मालूम होता है कि समुद्र क्या है। ठीक वैसा ही ये इंतजार शब्द।

  मगर क्या आपको मालूम है लोग इंतजार शब्द का प्रयोग क्यों करते हैं तो आप कहेंगे, किसी कार्य का हल निकालने या अपने कार्य से छुटकारा पाकर आपसे मिलने के लिए। मगर ये उत्तर गलत है क्योंकि इस शब्द का ज्यादा प्रयोग लोग किसी चीज से पीछा छुड़ाने के लिए करते हैं और कुछ लोग आपका मज़ाक उड़ाने के लिए।

  अंग्रेजी के वेट् शब्द का हिन्दी अनुवाद है इंतजार, जो 18वीं शताब्दी में उस समय आया जब अंग्रेजी से हिन्दी शब्दकोष का निर्माण हुआ। इंतजार दो भाषाओं के दो शब्‍दों से मि‍लकर बना है संस्‍कृत के इत और उर्दू के ज़ार शब्‍द से। संस्‍कृत में इत का अर्थ होता है – थोड़ा सा और उर्दू के ज़ार का अर्थ होता है रुकावट, रुकना। इन दोनों शब्‍दों को जोड़ने से बनता है इंतजार, जि‍सका अर्थ होता है थोड़ा रुकना।

  उस दौरान इस शब्द का प्रयोग प्रतिक्षा करने जैसे शब्द के बदले में आया। प्रतिज्ञा शब्द कुछ ज्यादा ही कठोर शब्द है जिसे कहने पर सामने वाले व्यक्ति को बुरा भी लग सकता है मगर इंजतार शब्द बहुत ही व्यवहारिक शब्द है।

  आपका पाला अक्सर इस शब्द से पड़ता है। रेलवे का टिकट हो या बस का टिकट, होटल में खाना खाना हो या उसका बिल ज्मा करना, नौकरी ढूंढना हो या पढ़ाई करने के लिए अच्छे संस्थान चुनना, अपने परीक्षा का परिणाम जानना हो या फिल्म के लिए टिकट खरीदना हो, बिल जमा करना हो या नया कनेक्शन लेना हो, सभी जगह इंतजार करना पड़ता है।
  
  आज इस शब्द का सबसे ज्यादा मजाक उड़ाया जाता है। जब आप अपने परीक्षा के परिणाम जानने के लिए संस्थान पहुंचते हैं, जब आप किसी संस्था में नौकरी के लिए जाते हैं, किसी अच्छे संस्थान में दाखिला देने के लिए जाते हैं या किसी सरकारी अस्पताल में अपनी बिमारी का ईलाज कराने के लिए जाते हैं, सभी जगह बस इसी शब्द का प्रयोग किया जाता है क्योंकि वे सभी आपका कार्य करने से परोक्ष रुप से मना नहीं कर सकते, इसलिए आपसे कहते हैं कि आप कुछ पल इंतजार करें, आपका कार्य हो जाएगा, मगर कब होगा ये नहीं बताते। अंतत: आप स्वयं उस स्थान को छोड़ देंगे या हट जाएंगे।

  ये तो फिर वैसे भी बात हो जाती है जब आप किसी संस्थान में नौकरी प्राप्त करने के लिए साक्षात्कार के लिए जाते हैं। आपके साक्षात्कार के बाद आपसे कहा जाता है कि आप बाहर इंतजार करें या आपको कुछ दिनों में परिणाम बता दिया जाएगा, मगर आपका इंतजार खत्म नहीं होता और आखिरकार अपने आप से ये सवाल करते हैं कि क्या वाकई इंतजार का फल मीठा होता है? क्या वाकई इंजतार करना सही होता है?, क्या उनके लिए हमारे समय की कोई कीमत नहीं है? इन्हीं सभी प्रश्नों के उत्तर खोजते समय आप नकारात्मक हो जाते हैं। मगर अभी भी आपको उस परिणाम का इंतजार होता है।

  आखिर में फिर वहीं सवाल रह जाता है कि क्या वाकई इंतजार का फल मीठा होता है? क्या दूसरों का समय हमारे समय से ज्यादा महत्वपूण होता है? क्या उनकी नजर में हमारी वैल्यू कुछ नहीं होती? आखिर हम कब तक इंतजार करें, कब हमारे सब्र का बांध टूटेगा और हम कहेंगे, बस अब नहीं कर सकते और इंतजार। मगर ये भी सच्चाई है कि हम ये शब्द नहीं कह सकते क्योंकि कहीं ना कही व किसी ना किसी रुप में हम दूसरों पर निर्भर होते हैं और हमारा कार्य उनके बिना नहीं हो सका। इसलिए हमे इंतजार करना होगा और ऐसा भी हो सकता है कि ये इंतजार कुछ लंबा ही करना पड़े। मगर ये बात जरुर सही है कि आप जितना इंतजार करेगें, लोग आपसे उतना ही इंतजार कराएंगे और कहेंगे, बेटा इंतजार का फल मीठा होता है।

धन्यवाद 

Monday, 8 June 2015

सॉरी शब्द: उपयोग और इसके मायने

राकेश कुमार

   सॉरी, पूरे विश्व में यह आज बहुत ज्यादा प्रचलित और प्रयोग किए जाने वाला शब्द है। आप किसी भी घटना, दुर्धटना के बाद इस शब्द को बोल कर आप बच कर निकल सकते हैं और सामने वाला पीड़ित व्यक्ति भी केवल इस छोटे से शब्द बोलने से ज्यादा प्रभावित हो जाता है। मगर आजकल इसका प्रयोग कुछ ज्यादा ही होने लगा है और इसके मायने भी बदल गए हैं।
आज लोग किसी को जानबुझ कर मारपीट कर, हत्या कर, छेड़कर, प्रताड़ित कर, धक्का देकर, विवादित टिप्पणी कर या फिर ऐसे भी बहुत सारी घटनाओं को के बाद उससे बचने के लिए इस तरह के शब्द बोलते हैं और बचकर निकल जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि वह व्यक्ति जिसने उस घटना के बाद सॉरी बोला है, उसके बाद उसने उस तरह की घटनाओं से दूर हुआ है या ऐसी घटनाएं दुबारा नहीं दुहराता है?

   आपका जवाब होगा नहीं। तो फिर लोग इस तरह के शब्द क्यो बोलते हैं?, क्या वो इसका मतलब नहीं जानते या इसका महत्व नहीं जानते, या फिर जानबुझ कर दूसरों पर अपनी छाप छोड़ने के लिए करते हैं। तो आइए आज हम आपको बताते हैं इसके मायने और अर्थ।


  सॉरी शब्द पूरे विश्व में 20वीं सदी में प्रचलन में आया। इसकी शुरुआत ऑस्ट्रेलिया से 26 मई 1998 को उस समय हुआ जब ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड अपनी संसद को संबोधित करने के दौरान एक सांसद के प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे, तभी एक गलती की माफी मांगने के दौरान अचानक ही उनकी मुख से सॉरी शब्द निकल पड़ा। इस तरह सॉरी शब्द की उत्पति हुई। यानी सॉरी शब्द राजनीति में अपनी गलतियों पर माफी मांगने के लिए हुई।

  श्री जॉन हॉवर्ड ने सॉरी शब्द के मायने और अर्थ समझाते हुए कहा कि अनजाने में की गई कोई गलती के बाद जब उसका एहसास हो कि मैने यह गलती कर दी, उसे जल्द से जल्द सुधारा जा सकता है तो आप सॉरी बोलकर सभी से क्षमा मांग सकते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि यदि कोई व्यक्ति कोई गलती, जिसका उसे ज्ञान नहीं है, करता है तो वह सॉरी बोल कर अपनी गलतियों को सुधार सकता है। इसके बाद ही इस शब्द का प्रयोग पूरे विश्व में फैल गया।

  आजकल की भाग-दौड़ भरी जीदंगी में हर व्यक्ति जल्दी में रहता है और दूसरों को आगे निेकले का प्रयास करता रहा है। इस दौरान ना जाने वह कितनों को कई बार धक्का दिया हो, नुकसान पहुंचाया होगा, मगर हर बार वो उसे सॉरी बोलकर और अपनी गलतियों को नजरअंजाद कर आगे निकल जाता है। ऑस्ट्रेलिया में बढ़ रही ऐसी ही घटनाओं के बाद वहां की संसद ने वर्ष 2008 में 26 मई को राष्ट्रीय सॉरी दिवस मनाने की घोषणा कर दी। उस दिन लोगों की कोशिश यह रहती है कि सॉरी शब्द का प्रयोग कम से कम या ना के बराबर करें।

  आज जरुरत है हमें भी कुछ ऐसा करने की जिससे पूरा जनसमुदाय इस शब्द के मायने और अर्थ को समझ कर सॉरी बोलने से पहले एक बार सोचें और अपनी जीदंगी में इस तरह के शब्दों का कम से कम प्रयोग करें। 
धन्यवाद