Sunday, 8 November 2015

अहंकार ने बदली बि‍हार की तस्‍वीर

राकेश कुमार

 अहंकार इंसान को गलत रास्‍ते पर ले जाती है और उसका परि‍णाम हमेशा ही गलत होता है। 08 नवंबर 2015 को बि‍हार वि‍धानसभा चुनाव परि‍णाम भी इसी का उदाहरण है जहां भाजपा जैसी राष्‍ट्रीय पार्टी को 2014 लोकसभा में मि‍ली अप्रयासि‍त जीत ने इसतरह अहंकार में ला दि‍या कि‍ एकतरफ जहां बीजेपी 2014 में ही दि‍ल्‍ली वि‍धानसभा का चुनाव हार गई थी और अब बि‍हार में भी उसकी करारी हार हुई है। वहीं दूसरी तरफ बि‍हार नीतीश कुमार ने चुनाव की शुरुआत लोकसभा चुनाव में मि‍ली करारी हार से सबक लेते हुए उसी समय से कर दी थी जि‍सके परि‍णाम स्‍वरूप आज जदयू महागठबंधन को बि‍हार में पूर्ण बहुमत मि‍ला।

 भाजपा की इस हार ने जहां बीजेपी को बैकफुट पर ला खड़ा कर दिया है वहीं मोदी और भाजपा विरोधियों को एक बार फिर साथ खड़े होने का मौका दे दिया है। कांग्रेस जैसी राष्‍ट्रीय पार्टी जो कभी भी बिहार विधानसभा चुनाव में 10 से ज्‍यादा सीटें नहीं जीत पाती थी, उसने भी भाजपा को अपनी ताकत दिखा दी है। महागटबंधन की इस जीत ने कई भाजपा विरोधियों को अपने तरफ खिंचने में सफल होती जा रही है जो भविष्‍य में केंद्र में भाजपा के मुश्किले खड़ी कर सकता है। लालू प्रसाद ने पहले ही धोषण की दी है क‍ि बिहार फत‍ह के बाद अब दिल्‍ली की बारी है।

 इस चुनाव में भाजपा से कई महत्‍वपूर्ण गलति‍यां की जि‍सके कारण जहां बीजेपी, जो 2009 वि‍धानसभा चुनाव में अकेले ही 90 से ज्‍यादा सीटें जीत पाई थी, ने अपने सहयोगी दलों के साथ भी 80 के ऑकड़ों को पार नहीं कर पाई।
1.     
    डीएनए मामला: वि‍धानसभा चुनाव शुरु होने से पूर्व देश के पीएम मोदी द्वारा बि‍हार के मुजफ्फरपुर में एक सभा को सबोंधि‍त करते हुए कहा था कि‍ बि‍हार की जनता का डीएनए खराब हो गया है जि‍सके बाद पीएम मोदी की काफी आलोचना हुई। बि‍हार की जनता सहि‍त देश की जनता पीएम मोदी द्वारा दि‍ए गए इस तरह की भाषणबाजी से काफी नाराज हुए। जदयू और राजद सहि‍त सभी वि‍पक्षी पार्टियों ने मोदी से बि‍हार की जनता से तुरंत मांफी मांगने को कहा मगर भाजपा ने इससे इंकार कर दि‍या। जि‍सका खामि‍याजा मोदी को चुनाव में उठाना पड़ा।
2.        
    दि‍ल्‍ली की हार से सबक ना लेना: 2014 में लोकसभा चुनाव की तुरंत बाद ही दि‍ल्‍ली में वि‍धानसभा का चुनाव हुआ जि‍समें बीजेपी की करारी हार हुई थी। भाजपा तथा मोदी-अमि‍त शाह की टीम ने इस हार से सबक नहीं लि‍या और दि‍ल्‍ली की जनता को ही इसका जि‍म्‍मेदार बताया। साथ ही इस हार की ठीकर बीजपी मुख्‍यमंत्री की उम्‍मीदवार कि‍रण बेदी के सर फोड़ अपना पल्‍ला छाड़ लि‍या जि‍सका गलत असर भारत की जनता पर हुआ।

   3.     मुख्‍यमंत्री का उम्‍मीदवार घोषि‍त ना करना: दि‍ल्‍ली वि‍धानसभा चुनाव से पूर्व बीजेपी ने कि‍रण बेदी का अपना उम्‍मीदवार घोषि‍त कि‍या था जो चुनाव तक हार गई थीं। इस बार भाजपा ने बि‍हार चुनाव में बि‍ना मुख्‍यमंत्री उम्‍मीदवार के मैदान में उतरने की सोंची जि‍सका गलत परि‍णाम बि‍हार की जनता तथा मीडि‍या पर पड़ा। भाजपा ने बि‍हार में दि‍ल्‍ली की तर्ज पर मोदी और अमि‍त शाह पर वि‍श्‍वास कर चुनाव लड़ा जिसका परि‍णाम बि‍हार की जनता ने उन्‍हें सत्‍ता से काफी दूर रखाा।
4.
             भाजपा द्वारा स्‍थानीय नेताओं पर वि‍श्‍वास ना करना: भाजपा ने इस चुनाव में अपने ही पार्टी के स्‍थानीय नेताओं पर वि‍श्‍वास नहीं कि‍या जि‍सके कारण पार्टी में अंदरुनी गति‍रोध बना रहा और स्‍थानीय नेता खुलकर कोई प्रचार नहीं कर पा रहे थे। भाजपा की राष्‍ट्रीय टीम बि‍हार में पूरी तरह से मोदी, अमि‍त शाह, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, सुशील मोदी, रामविलास पासवास   तथा मांझी पर ही टिकी रही। वहीं महागंठगंधन ने पूरी तरह से नीतीश कुमार और लालू यादव को आगे रखकर चुनाव लड़ा।
5.
              नीतीश कुमार के खिलाफ कोई योजना नहीं बनाना: भाजपा की सबसे बडी चुनौती रही नीतीश कुमार के खिलाफ कोई योजना नहीं बना पाना और ना ही उनके खिलाफ जनता को आक्रोशित करना। मोदी और अमित शाह की पूरी टीम लालू यादव और जंगलराज पार्ट-2 को ध्‍यान में रखकर चुनाव प्रचार किया जिसके कारण उनकी रणनीति कारगर शाबित नहीं हुई। वहीं नीतीश कुमार ने पूरी तरह विकास को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा।